नाबार्डने 2025-26 के लिए ओडिशा की ऋण क्षमता 2,52,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया ।

नाबार्ड (NABARD) ने ओडिशा के लिए वित्त वर्ष 2025-26 का “स्टेट फोकस पेपर” जारी किया, जिसमें बताया गया कि राज्य में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (जैसे कृषि, लघु उद्योग, ग्रामीण विकास) के लिए बैंकों के जरिए 2.52 लाख करोड़ रुपये तक के कर्ज की संभावनाएं हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 20% ज्यादा है, यानी नाबार्ड चाहता है कि ओडिशा में किसानों, छोटे उद्यमियों और ग्रामीण क्षेत्रों को पहले से ज्यादा लोन मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। इस कार्यक्रम में ओडिशा के उपमुख्यमंत्री ने भी कहा कि राज्य सरकार इस प्रक्रिया को सपोर्ट कर रही है, खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर। कुल मिलाकर, यह योजना राज्य के विकास को तेज करने और लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बनाई गई है।

ओडिशा में आयोजित इस संगोष्ठी का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव ने किया। इस कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री मनोज आहूजा (आईएएस), सहकारिता विभाग के आयुक्त-सह-सचिव श्री राजेश प्रभाकर पाटिल (आईएएस) और एसएलबीसी के संयोजक श्री गौतम पात्रा भी शामिल हुए। इसके अलावा, राज्यभर से बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, सरकारी विभागों के प्रतिनिधि, किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्य और अन्य हितधारक भी इस चर्चा का हिस्सा बने। इस संगोष्ठी का मकसद राज्य में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, खासतौर पर कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण को बढ़ावा देना और आर्थिक विकास के लिए बेहतर रणनीतियां तैयार करना था।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. सुधांशु केके मिश्रा ने इस मौके पर बताया कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में वित्तीय सहायता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने जानकारी दी कि नाबार्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.52 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य रखा है, जिससे किसानों और छोटे उद्यमियों को फायदा मिलेगा। चर्चा के दौरान प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया, ताकि गांवों में किसानों को आसानी से ऋण मिल सके और वे अपने व्यवसाय को बढ़ा सकें। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के उपायों पर भी बातचीत हुई।

संगोष्ठी में बैंकों और सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने यह भी माना कि किसानों और छोटे व्यवसायियों को ऋण प्राप्त करने में कई दिक्कतें आती हैं। इस समस्या को हल करने के लिए ऋण प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की बात कही गई। किसानों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए और सुझाव दिए कि किस तरह सरकारी योजनाओं को और कारगर बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में कुछ सफल किसानों और सहकारी संस्थाओं की कहानियां भी साझा की गईं, जिन्होंने सरकारी योजनाओं और बैंक ऋण की मदद से अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। इन उदाहरणों से यह समझाया गया कि यदि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को समय पर और सही वित्तीय मदद मिले, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति में भी योगदान दे सकते हैं। संगोष्ठी के अंत में सभी हितधारकों ने मिलकर यह सहमति जताई कि ऋण वितरण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि जरूरतमंद किसानों और उद्यमियों को सही समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि नाबार्ड ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आदिवासी विकास, वाटरशेड प्रबंधन और स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के बीच सूक्ष्म उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अपना सहयोग बढ़ा रहा है। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका को मजबूत करना और आर्थिक विकास को गति देना है।

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