प्रगतिशील किसान नरेंद्र मेहरा ने एक और उपलब्धि हासिल की है। एक पौध से 24 किलो हल्दी का उत्पादन लेकर वह चर्चा में आ गए हैं। यहां हैरान होने वाली बात यह है कि एक किलो बीज से 10 से 12 किलो हल्दी पैदा होती है। नरेंद्र ने एक पौधे से 24 किलो हल्दी उत्पादित की है। इसलिए लोग अचंभित होकर उनके घर आ रहे हैं। स्थानीय लोग हल्दी की कंद देखने व मेहरा की उपलब्धि का रहस्य जानने घर पहुंच रहे हैं। उद्यान विज्ञानी इसे अप्रत्याशित मान कर मेहरा के दावे को परखने की तैयारी में हैं।
हल्द्वानी के गौलापार निवासी नरेंद्र मेहरा प्रगतिशील किसान हैं। जैविक खेती की दिशा में कार्यरत मेहरा ने एक पौधे से 24 किलो हल्दी उत्पादित करने का दावा किया है। वह आशान्वित हैं कि हल्दी अधिक उत्पादन देती है तो भविष्य में हजारों किसानों को अधिक आर्थिक लाभ मिल सकता है। इससे पहले मेहरा गेहूं की प्रजाति नरेंद्र-09 विकसित कर चुके हैं। जिसे भारत के पौधा किस्म व कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण की मंजूरी मिली है।
इस तरह किया उत्पादन।
मेहरा ने बताया कि दो वर्ष पहले उन्होंने घर के पास पानी का टैंक बनवाया। टैंक की खुदाई के दौरान निकली मिट्टी में कुछ दिनों बाद हल्दी का पौधा उग आया। पहले वर्ष इससे तीन-चार कोपल निकली। जिसके किनारे में वर्मी कंपोस्ट (गोबर की जैविक खाद) डाली। कीटनाशक रोकथाम के लिए तरल जैविक खाद का छिड़काव किया। पतझड़ में पत्तियां झड़ गईं, लेकिन अगले वर्ष फिर नई कोपल निकल आई। कंद के आसपास की मिट्टी निकालकर फिर से जैविक खाद दी।
मजदूरों की मदद से निकाली कंद।
मेहरा ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने हल्दी के पौधे का खुदान किया। पौधा उनकी उम्मीद से अधिक विस्तार लिए था। गैंती व दो मजदूरों की मदद से हल्दी की कंद को निकाला। मेहरा ने बताया कि जब उसे तराजू में तोला तो वह 24.140 किलो निकली।
इंडिया बुक आफ रिकार्ड से आया फोन।
इंटरनेट मीडिया के माध्यम से खबर फैलने के बाद नरेंद्र मेहरा को देश के विभिन्न हिस्सों से फोन आ रहे हैं। हरियाणा, पंजाब के कुछ किसानों के अलावा कृषि विज्ञानी भी फोन कर रहे हैं। मेहरा ने बताया कि इंडिया बुक आफ रिकार्ड की टीम ने इसे रिकार्ड में दर्ज कराने की बात कही है।
नैनीताल के मुख्य उद्यान अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि आमतौर पर एक किलो बीज 10 से 12 किलो हल्दी देता है। एक कंद से 24 किलो उत्पादन होना अप्रत्याशित है। वह हल्दी है या कुछ और जांच के बाद पता चलेगा। किसान के घर जाकर निरीक्षण किया जाएगा। जरूरत हुई तो जांच के लिए जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर स्थित लैब भेजा जाएगा।