भारत में कृषि विकास

फसल, मौसम और बाज़ार की जानकारी: किसानों को बेहतर योजना बनाने में मदद

भारत में कृषि सीधे मौसम से जुड़ी हुई है, जहाँ मौसमी बदलाव किसानों के लिए अवसर और चुनौतियाँ दोनों लेकर आते हैं। मौसमी अपडेट किसानों को समय पर बुवाई, सिंचाई, कीट प्रबंधन और कटाई से संबंधित सही निर्णय लेने में मदद करते हैं। वर्तमान कृषि मौसम में देशभर में खेती को प्रभावित करने वाले कुछ महत्वपूर्ण अपडेट इस प्रकार हैं:

बढ़ती लागत और किसानों की चिंताएँ

भारत में मानसून खेती की रीढ़ है। इस खरीफ सीजन में देशभर में बारिश असमान रही है, जिससे धान, मक्का, दलहन और कपास जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। पंजाब और हरियाणा में पर्याप्त नमी होने के कारण धान की बुवाई अच्छी रही है, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की कमी से धान की बुवाई में देरी हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून देर से आता है, तो किसानों को कम अवधि वाली किस्मों का चुनाव करना चाहिए ताकि नुकसान कम हो।

कीट और रोग अलर्ट

बदलते मौसम के कारण फसलों में कीटों का खतरा बढ़ गया है। मध्य भारत में कपास की फसल गुलाबी सूंडी (पिंक बॉलवॉर्म) के प्रकोप से जूझ रही है। वहीं, धान की फसल में तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि किसान समय पर जैविक घोल या सुरक्षित कीटनाशक का छिड़काव करें ताकि पैदावार को बचाया जा सके।

बाज़ार रुझान और मूल्य अनुमान

इस सीजन दालों और तिलहनों की मांग अधिक रहने की संभावना है क्योंकि पिछले वर्ष का स्टॉक कम है। अरहर, उड़द और सोयाबीन उगाने वाले किसानों को बाज़ार में ऊँचे दाम मिलने की उम्मीद है। सरकार ने भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की गारंटी दी है, जिससे किसानों को इस कटाई सीजन में अधिक भरोसा मिलेगा।

रबी फसल की तैयारी

खरीफ फसलों पर ध्यान देने के साथ-साथ किसानों को रबी फसलों जैसे गेहूं, सरसों और जौ की तैयारी भी पहले से शुरू करने की सलाह दी जा रही है। समय पर खेत की जुताई और जल संरक्षण के उपाय किसानों को मानसून के बाद रबी सीजन की सुचारू शुरुआत में मदद करेंगे।

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