बिहार सरकार प्याज के भंडारण के लिए 4.50 लाख रुपये तक की सहायता दे रही है। जानिए कैसे करें आवेदन।

बिहार सरकार किसानों को प्याज स्टोरेज हाउस बनाने के लिए 4.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। इसका उद्देश्य प्याज के बेहतर भंडारण और नुकसान को कम करना है। इच्छुक किसान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। फसल वर्ष 2024-25 में प्याज का उत्पादन 19% बढ़कर 288.77 लाख टन होने की उम्मीद है, जबकि पिछले वर्ष यह 242.67 लाख टन था। यह वृद्धि किसानों के लिए लाभदायक तो है, लेकिन स्टोरेज की समस्या भी बढ़ा सकती है। प्याज का सही तरीके से भंडारण न होने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी समस्या को देखते हुए बिहार सरकार ने किसानों को प्याज स्टोरेज हाउस बनाने के लिए सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत किसान भंडारण सुविधा का लाभ उठा सकते हैं, जिससे फसल को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

बिहार सरकार की प्याज स्टोरेज हाउस सब्सिडी योजना का लाभ राज्य के 23 जिलों के किसान उठा सकते हैं। इनमें भोजपुर, बक्सर, जहानाबाद, कैमूर, लखीसराय, नवादा, सारण, शेखपुरा, सिवान, औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, गया, खगड़िया, मधुबनी, मुंगेर, नालंदा, पटना, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर और वैशाली शामिल हैं। इस योजना का उद्देश्य किसानों को प्याज के भंडारण की बेहतर सुविधा देना है, जिससे वे बंपर उत्पादन के बावजूद फसल को सुरक्षित रख सकें और नुकसान से बचें। इससे प्याज की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। बिहार सरकार किसानों को प्याज स्टोरेज हाउस बनाने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। 50 मीट्रिक टन क्षमता वाली प्याज भंडारण संरचना की अनुमानित लागत 6 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार 75% यानी 4.50 लाख रुपये की सब्सिडी दे रही है। किसान केवल 25% राशि खुद वहन कर प्याज गोदाम बना सकते हैं, जिससे वे अपनी उपज को सुरक्षित रख सकेंगे और उचित दाम मिलने तक भंडारण कर सकेंगे।

निर्माण कार्य आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर शुरू करना अनिवार्य होगा, अन्यथा वर्क ऑर्डर रद्द कर दिया जाएगा। प्याज भंडारण संरचना का अनुमोदित मॉडल, एस्टीमेट और नक्शा भूमि संरक्षण निदेशालय और बी.ए.यू., सबौर द्वारा प्रदान किए गए लिंक पर उपलब्ध है, जिसे किसान आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। यह योजना प्याज के बंपर उत्पादन से होने वाली स्टोरेज समस्या का समाधान करेगी और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी।

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