प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को आज (मंगलवार) नौ साल पूरे हो गए हैं। यह योजना 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी, जो किसानों को अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से सुरक्षा प्रदान करती है। योजना के तहत, किसानों को जोखिम से बचाने के लिए व्यापक कवरेज और वित्तीय सहायता मिलती है।
इस योजना की सफलता को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 2025-26 तक जारी रखने के लिए 69,515.71 करोड़ रुपए के बजट के साथ मंजूरी दी है। अब तक 21.95 करोड़ किसानों को फसल बीमा का लाभ मिल चुका है और 1.72 लाख करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा, 72.61 करोड़ से अधिक किसानों ने फसल बीमा के लिए आवेदन किया है। इस योजना ने किसानों को उनके जोखिमों से निपटने के लिए एक मजबूत वित्तीय सहारा प्रदान किया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) में तकनीक का उपयोग किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे न केवल बीमा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाया जा रहा है, बल्कि नुकसान के आकलन और दावों के निपटारे में भी तेजी आ रही है। यह योजना विभिन्न उन्नत तकनीकों के माध्यम से फसल क्षेत्र और उपज का सही अनुमान लगाने में मदद करती है।
आपके द्वारा बताए गए प्रमुख तकनीकी पहलुओं में शामिल हैं:
उपग्रह इमेजरी और रिमोट सेंसिंग: ये तकनीकें फसल क्षेत्र के आकलन, उपज अनुमान और नुकसान मूल्यांकन के लिए उपयोगी हैं। उपग्रह चित्रों के माध्यम से बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा किया जा सकता है, जिससे किसी क्षेत्र विशेष की फसल स्थिति का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। रिमोट सेंसिंग से मौसम, भूमि उपयोग, और फसल विकास की निगरानी की जा सकती है, जो योजना की कार्यान्वयन को कुशल बनाता है।
ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी): ड्रोन का उपयोग खेती के विभिन्न हिस्सों की स्थिति की निगरानी के लिए किया जाता है। इनसे उन्नत इमेजरी प्राप्त होती है जो फसल स्वास्थ्य, जलवायु प्रभाव, और भूमि की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है।
सीसीई-एग्री ऐप और राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (एनसीआईपी): इस ऐप के माध्यम से किसान अपनी फसल उपज और फसल कटाई के प्रयोगों (C.C.E) की जानकारी सीधे पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। इससे डेटा का संकलन त्वरित और अधिक सटीक होता है, जिससे दावों के भुगतान में देरी नहीं होती। इन तकनीकों के माध्यम से पीएमएफबीवाई योजना में पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही में वृद्धि हो रही है, जिससे किसानों को उचित समय पर और बिना किसी भेदभाव के उनके नुकसान का मुआवजा मिल सकता है।