बेंगलुरु शहर में दो बहनें रिया करुतुरी और यशोदा करुतुरी फूलों की रंगीन और खुशबूदार दुनिया में पली-बढ़ीं। उनका परिवार फूलों की खेती से गहराई से जुड़ा हुआ था। उनके पिता ने इथियोपिया में एक छोटे से गुलाब फार्म से शुरुआत की और बाद में दुनिया के सबसे बड़े गुलाब फार्मों में से एक का निर्माण किया। रंगों, खुशबुओं और पंखुड़ियों की कहानियों के बीच उनका बचपन कुछ अनोखा करने की नींव बना।
जहां ज्यादातर लोग फूलों के गुलदस्तों और सजावट पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, वहीं इन बहनों ने एक अलग अवसर देखा — पूजा के फूलों का बाजार। भारत में पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल केवल सुंदरता के प्रतीक नहीं होते, बल्कि वे श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति का प्रतीक होते हैं। लेकिन इन्हें उगाने, सप्लाई करने और बेचने का तरीका दशकों से लगभग वैसा ही था।
उन्होंने 2019 में “रोज बाज़ार” नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया और 2020 में इसका नाम बदलकर “हूवू फ्रेश” रखा। उनका मिशन था — पूजा के लिए ऐसे फूल उपलब्ध कराना जो सच में ताजे, गुणवत्ता वाले और पवित्र हों। उन्होंने देखा कि कई घरों में मुरझाए और खराब फूल चढ़ाए जा रहे थे, जो श्रद्धा की भावना से मेल नहीं खाते थे। यशोदा ने कहा था, “एक भक्त के लिए फूलों की ताजगी उसकी भक्ति के बराबर होती है।”
उन्हें एहसास हुआ कि पूजा के फूलों का बाजार बहुत बड़ा है — गुलदस्ता बाजार से कई गुना बड़ा — लेकिन इसमें नवाचार की कमी थी। सप्लाई चेन कमजोर थी, बिचौलियों के कारण किसानों को नुकसान होता था और फूल कुछ ही दिनों में खराब हो जाते थे।
इसे बदलने के लिए रिया और यशोदा ने अपनी टीम के साथ मिलकर नई प्रक्रियाएं विकसित कीं। उन्होंने फूलों की बर्बादी को 40-60% से घटाकर लगभग 3% कर दिया। उन्होंने फूलों के उन हिस्सों का भी उपयोग किया जिन्हें पहले फेंक दिया जाता था — जैसे अगरबत्ती या धूप बनाने में। साथ ही उन्होंने ऐसी सप्लाई चेन बनाई जिससे फूलों की शेल्फ-लाइफ कुछ दिनों से बढ़कर लगभग 15 दिन तक हो गई — जो एक बड़ी उपलब्धि थी।
उनकी मार्केटिंग रणनीति आधुनिक रही — उन्होंने बिगबास्केट, जेप्टो, स्विगी जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपने उत्पाद उपलब्ध कराए, साथ ही घरों और मंदिरों में सीधी सप्लाई भी शुरू की। धीरे-धीरे हूवू फ्रेश ने फूलों के साथ-साथ धूप-कोन, अगरबत्ती जैसे अन्य पूजा-सामानों में भी विस्तार किया।
उनकी मेहनत और दृढ़ता ने उन्हें सफलता दिलाई। कोविड-19 महामारी के दौरान जहां कई व्यवसाय संघर्ष कर रहे थे, वहीं ऑनलाइन खरीदारी के चलन ने उनके बिजनेस को गति दी। आज हूवू फ्रेश हर महीने 1.5 लाख से अधिक ऑर्डर्स पूरे कर रहा है और करोड़ों का कारोबार कर रहा है।
उनकी यात्रा का एक अहम मोड़ तब आया जब वे शार्क टैंक इंडिया शो में दिखाई दीं। वहां उन्हें निवेश और देशभर में पहचान मिली। इस निवेश ने उनके विजन को और मजबूत किया।
लेकिन आंकड़ों से परे, इन बहनों का काम और भी गहरा है — उन्होंने परंपरा और आधुनिकता को खूबसूरती से जोड़ा है। उन्होंने दिखाया कि एक पारंपरिक क्षेत्र को आधुनिक बनाया जा सकता है बिना उसकी आत्मा खोए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाई, बर्बादी घटाई, मूल्य जोड़ा और उपभोक्ताओं को एक ऐसी पेशकश दी जो सिर्फ सुंदर नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से सही लगती है।
आगे चलकर, रिया और यशोदा का लक्ष्य हूवू फ्रेश को भारत के हर घर तक पहुंचाना है और पूजा-सामान के पूरे इकोसिस्टम में नवाचार लाना है। उनका संदेश है — “नए विचारों से डरिए मत, किसानों और उपभोक्ताओं के लिए मूल्य बनाइए और हमेशा सीखते रहिए।”
उनकी कहानी यह सिखाती है कि असली नवाचार हमेशा कुछ नया बनाने में नहीं, बल्कि पुरानी परंपराओं को नए नजरिए से देखने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने में है। अपनी पारिवारिक फूलों की विरासत और आधुनिक सोच को मिलाकर, करुतुरी बहनों ने सिर्फ फूल नहीं उगाए — उन्होंने एक नई सोच बोई है।

